केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक बयान को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. गुरुवार को सीतारमण ने कहा था कि कुछ छात्रों ने पेपर लीक की घटना का फ़ायदा उठाकर ज़्यादा मेहनत की.
उनके इस बयान पर कांग्रेस, कॉकरोच जनता पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) समेत कई दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
दरअसल, सीतारमण ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "अगर सरकार ने समय पर कार्रवाई नहीं की होती, समय पर गिरफ़्तारियां नहीं हुई होतीं, समय पर दोबारा परीक्षा नहीं हुई होती और घटना के बाद समय पर नतीजे घोषित नहीं किए गए होते, तो आज युवा उन संस्थानों में दाख़िला लेने की स्थिति में नहीं होते, जहां उन्हें आगे की पढ़ाई करनी है.
उन्होंने कहा, "यह सब हो रहा है और कुछ युवा खुद सामने आकर कह रहे हैं कि हां, जब पेपर लीक हुआ था तो मुझे दुख हुआ था, लेकिन बाद में मैंने इसका फ़ायदा उठाया और ज़्यादा मेहनत से तैयारी की. मेरी परफ़ॉर्मेंस बेहतर हुई और मैंने अच्छा किया. ऐसे भी युवा हैं जिन्होंने इस चुनौती का सामना किया और इससे निकलकर अच्छी सफलता हासिल की."
वित्त मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे असंवेदनशील और ग़ैर-जिम्मेदाराना क़रार दिया.
कांग्रेस ने अपने पोस्ट में लिखा, "जिस पेपर लीक ने 21 से अधिक बच्चों की जान ले ली, जिसके ख़िलाफ़ लाखों युवा आंदोलन कर रहे हैं, उसी के फ़ायदे सरकार गिना रही है. यह बयान इस बात का सबूत है कि मोदी सरकार पेपर लीक रोकने को लेकर गंभीर नहीं है. इन लोगों ने देश की शिक्षा व्यवस्था का कबाड़ा कर दिया है."
आम आदमी पार्टी ने कहा, "मैडम वित्त मंत्री को परिचय की आवश्यकता नहीं है. वह फिर से लौट आई हैं- इस बार पेपर लीक होने के फायदों के बारे में बता रही हैं."
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भी सीतारमण के बयान की आलोचना की. पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, "पेपर लीक एक विकराल रूप धारण कर चुका कैंसर है. झारखंड की हेमंत सरकार इस कैंसर का सर्वनाश कर रही है, मगर बीजेपी कहती है कि पेपर लीक के अपने फ़ायदे हैं."
वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने तंज कसते हुए कहा, "इस तर्क के हिसाब से तो देश में सारे पेपर लीक होने चाहिए."