10 दिनों में क्या हुआ जिससे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद जंतर-मंतर पर धरना हुआ ख़त्म

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर महज़ दस दिनों में घटनाएं इतनी तेज़ी से बदलीं कि युवाओं का एक आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आकर ऐतिहासिक घटना बन गया.

सोशल मीडिया पर एक व्यंग्य से निकली 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जनता से मिले वर्चुअल समर्थन को युवाओं के आंदोलन में बदल दिया.

उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग समेत अपनी प्रमुख मांगें पूरी होने के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी है.

सोनम वांगचुक और अन्य स्टूडेंट्स की भूख हड़ताल, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, संसद मार्च, विपक्ष की लामबंदी और सरकार के लगातार डैमेज कंट्रोल के प्रयासों के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर दबाव बढ़ता गया था.

आख़िर किन घटनाओं ने इस माहौल को बनाया और कैसे बात उनके इस्तीफ़े की पेशकश तक पहुंची, इस कहानी में ऐसी ही कुछ अहम बातों को समझने की कोशिश करेंगे.

वांगचुक की भूख हड़ताल बढ़ी तो साथ आए विपक्षी दल

  • 15 जुलाई – शशि थरूर ने एक खुला खत लिखकर सोनम वांगचुक से अनशन तोड़ने की अपील की. यह उनके अनशन का 18वां दिन था. उन्होंने कहा था कि संसद शुरू होने वाली है, वहां यह मुद्दा उठाएंगे, आपके भूखे जान दे देने से यह मामला हल नहीं होगा.
  • 16 जुलाई – दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को सोनम वांगचुक की तबियत पर नज़र रखने और ज़रूरत के मुताबिक़ कदम उठाने का निर्देश दिया.
  • इसी दिन अरविंद केजरीवाल और सपा सांसद डिंपल यादव जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे. कांग्रेस ने पहली बार वांगचुक का समर्थन किया. उधर, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह और केरल में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने उनके प्रति समर्थन जताया.
  • 17 जुलाई – दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को बदल दिया गया. सतीश गोलचा को उनका कार्यकाल पूरा हुए बिना हटाकर उनकी जगह अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस का नया कमिश्नर बनाया गया.
  • इसी दिन सोनम वांगचुक ने कहा कि वो किसी भी तरह 20 जुलाई तक जीवित रहेंगे. यह संसद के मानसून सत्र का पहला दिन था, और वांगचुक ने समर्थकों को इसी दिन 'चलो संसद' में शामिल होने की कॉल दी थी.

जंतर मंतर से वांगचुक को उठा ले जाने से आक्रोश फैला

  • 18 जुलाई – इस दिन तड़के दिल्ली पुलिस बड़ी तादाद में प्रदर्शन स्थल पर पहुंची और सफ़ेद चादर को मंच से ढंकते हुए अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को उठाकर ले गई. हालांकि आइसा (एआईएसए) से जुड़े तीन छात्र-छात्राओं ने जंतर-मंतर पर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी.
  • उधर, बीजेपी ने वांगचुक को ले जाने की कार्रवाई को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप बताया. बीजेपी ने कहा कि सोनम वांगचुक की तबियत गंभीर थी, जिसे उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने ख़ारिज किया.
  • गीतांजलि अंगमो ने सफ़दरजंग अस्पताल से कहा कि उनके पति को उनकी अनुमति के बिना कुछ भी न खिलाया-पिलाया जाए, न ही नसों के ज़रिए कुछ दिया जाए. उन्होंने घोषणा की- अगर 20 जुलाई को वांगचुक मार्च में नहीं जा सके तो वो उनकी जगह जाएंगी और "पूरे देश में उस दिन समर्थन में रैलियां होंगी."
  • इधर जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने अनशन शुरू करने का एलान किया और दिल्ली पुलिस की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा "अगर उन्हें वाकई सोनम वांगचुक की तबीयत का ख़याल था तो वो वर्दी में क्यों नहीं आए." यहीं एक महिला ने उनके ऊपर स्याही फेंक दी. जिसके बाद दीपके ने उसे अपनी दलित पहचान से जोड़ते हुए कहा- 'ये नीला तो मेरा रंग है.'
  • सफ़दरजंग अस्पताल ने हेल्थ बुलेटिन में बताया कि वांगचुक की सेहत गिर गई है. विपक्षी दलों ने संकेत दिए कि वे इस मुद्दे को दो दिन बाद शुरू हो रहे संसद सत्र में उठाएंगे.
  • 19 जुलाई – सोनम वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी देने से जुड़ी उनकी पत्नी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने तुरंत सुनवाई की, मगर उनकी मांग ख़ारिज कर दी और कहा कि इस मुद्दे पर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद फ़ैसला होगा.
  • देर शाम वांगचुक की पत्नी डॉक्टर गीतांजलि ने जंतर-मंतर के मंच से घोषणा की कि अगर नेता और सांसद वांगचुक से मिलकर इस मुद्दे को संसद में उठाने का आश्वासन दिलाएंगे तो वो अपना अनशन तोड़ देंगे. इस रात जंतर-मंतर और उसके आसपास बड़ी पुलिस तैनाती हो चुकी थी.

20 जुलाई का संसद मार्च

  • 20 जुलाई – आइसा के तीन विद्यार्थियों नेहा, मनीष और आमीन ने शबाना आज़मी और प्रमुख नेताओं के हाथ से जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा. फिर अभिजीत दीपके ने भी अपना दो दिन पुराना अनशन तोड़ा.
  • फिर हज़ारों की संख्या में जमा हुए प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़े, जहां बैरिकेडिंग तोड़ते समय दिल्ली पुलिस ने उनके ऊपर लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. इस घटना में कई स्टूडेंट्स और पुलिस कर्मी भी घायल हुए.
  • प्रदर्शन के दौरान ही केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सीजेपी प्रतिनिधि को मिलने के लिए बुलाया और सीनियर लीडरशिप तक उनकी बात पहुंचाने की बात कही.
  • शाम होते-होते पुलिस ने धरना स्थल को भी तोड़कर हटा दिया. मगर दीपके ने प्रदर्शन जारी रखने का एलान किया.
  • उधर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत सभी प्रमुख नेताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के लिए सरकार की आलोचना की.
  • देशभर से पुलिस की इस कार्रवाई के ख़िलाफ़ आम से ख़ास लोगों तक की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और कमेंट में देखने को मिले.

राहुल गांधी के पीएम आवास पर धरने से बढ़ा दबाव

  • 21 जुलाई – प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस के लाठी चार्ज के विरोध में विपक्ष ने एकजुट होकर समर्थन किया. उधर, राहुल गांधी और जेपी नड्डा ने अस्पताल जाकर घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाक़ात की.
  • फिर दोपहर बाद अचानक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव ने कांग्रेस सांसदों के साथ मिलकर पीएम आवास के सामने धरना शुरू कर दिया.
  • इस बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह राहुल गांधी से वार्ता करके धरना ख़त्म करने की पहल करने के लिए पहुंचे. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी नीट विवाद पर संसद में वार्ता के आश्वासन के बाद धरना ख़त्म करने को मान गए, मगर फिर उन्होंने बात से पलटते हुए इस्तीफ़े की मांग की.
  • इसी दिन, भारत-अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली आ रहे किसान संगठन को पंजाब बॉर्डर पर रोक दिया गया.

वांगचुक से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री

  • 22 जुलाई – दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में भर्ती कराने की अनुमति दे दी तो उन्हें सफ़दरजंग अस्पताल से मेदांता में शिफ़्ट कराया गया.
  • वहीं देर शाम केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे. इसके बाद वांगचुक ने सरकार के सामने दो मांगें रखीं: प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ़ कोई कानूनी कार्रवाई न करने का आश्वासन और पेपर लीक से प्रभावित मृतक छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा. उन्होंने कहा कि इन मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने पर वे अनशन समाप्त कर देंगे.
  • इसी दिन विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग दोहराई, सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी पीएम मोदी को पत्र लिखकर इस्तीफ़ा स्वीकार करने की अपील की, जबकि देश के कई हिस्सों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रदर्शन हुए.
  • युवाओं पर दिल्ली पुलिस के एक्शन से जुड़े एक मामले में सुनवाई के दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि "उनका समय न बर्बाद किया जाए." बाद में उन्होंने इसे गलत रिपोर्टिंग बताया.
  • सरकार ने विपक्ष को संसद में बहस का प्रस्ताव दिया मगर विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा होने के बाद ही संसद में नीट विषय पर चर्चा के लिए सहमति देने की बात कही.
  • सीजेपी ने अपने प्रवक्ता विजेता दहिया को ग़ैर ज़िम्मेदाराना व्यवहार करने के चलते पार्टी से निकाल दिया.
  • राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके केंद्र सरकार पर आरोप लगाए कि उन्होंने दिल्ली पुलिस के ज़रिए प्रदर्शनकारियों पर लाठियों से लेकर पैलेट गन तक चलवाई.
  • देश के कई हिस्सों में कांग्रेस और भाजपा ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए. पटना और हैदराबाद में हुए प्रदर्शनों में कई लोग घायल भी हो गए.

आख़िर 26वें दिन अनशन ख़त्म की

  • 23 जुलाई – पीएम नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामले में फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से जुड़े कानून के मसौदे की घोषणा की. फिर रात में एक वीडियो बयान जारी करके छात्रों को भरोसा दिलाने का प्रयास किया.
  • लगभग इसी समय दो केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने अनशन के 26वें दिन इसे तोड़ा. हालांकि केंद्रीय मंत्रियों के हाथ से अनशन तोड़ने को लेकर उनके ऊपर महुआ मोइत्रा समेत कुछ नेताओं ने सवाल भी उठाए.
  • सरकार ने जंतर मंतर के क्षेत्र में इंटरनेट बंद करने का आदेश सभी मोबाइल नेटवर्क कंपनियों को दिया.
  • बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए उनकी मांगों को वैध बताया.
  • 24 जुलाई – पेपर लीक के मामले में फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने से जुड़े कानून के मसौदे को केंद्रीय कैबिनेट ने मंज़ूरी दी. पेपर लीक करने पर दस करोड़ के जुर्माने और दस साल की सज़ा वाले इस विधेयक को अगले सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा.
  • इसी दिन फिर से दूसरी बार केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की सीजेपी के अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका से मुलाक़ात हुई.
  • 15-17 मेट्रो स्टेशन लगातार तीसरे दिन बंद रहने से आम लोगों को काफ़ी परेशानी उठानी पड़ी.

और फिर हुई इस्तीफ़े की घोषणा

  • 25 जुलाई - धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर एक लेटर जारी करके अपने इस्तीफ़े का ऐलान किया. जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आशुतोष रांका और सौरव दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि उनकी सभी मांगें मान ली गई हैं इसलिए अब देश में अलग-अलग जगहों पर जारी इस आंदोलन को समाप्त किया जाएगा.
  • यह समझौता सरकार और सीजेपी पक्ष के बीच तीसरे दौर की वार्ता के बाद हुआ है.
  • सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो बोलीं, 'युवाओं ने साबित किया अंधभक्ति के बिना देशभक्ति निभाई जा सकती है.'

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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