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बिहार: तेज प्रताप यादव को क्यों किया गया गिरफ़्तार?
बिहार सरकार में पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव को शनिवार रात गिरफ़्तार कर लिया गया.
गिरफ़्तारी के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में पटना की बेऊर जेल भेज दिया गया है.
दरअसल, तेज प्रताप यादव 25 जुलाई को पटना में आयोजित बिहार बंद में शामिल हुए थे. इस दौरान पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया था.
इसके बाद शाम को पुलिस उन्हें पटना के एक मॉल से अपने साथ ले गई. पुलिस उन्हें नौबतपुर थाने लेकर पहुँची, जहाँ देर रात उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. फ़िलहाल वो बेऊर जेल में बंद हैं.
तेज प्रताप यादव के वकील जगन्नाथ सिंह ने बताया कि उन्हें सिर्फ़ अरेस्ट मेमो मिला है, जबकि एफ़आईआर की कॉपी अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है.
उन्होंने कहा कि तेज प्रताप यादव पर धारा 109 और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़ी धाराएँ लगाई गई हैं.
अभिजीत दीपके से की थी अपील
गौरतलब है कि तेज प्रताप यादव ने हाल ही में सोशल मीडिया के ज़रिए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके से बिहार में आंदोलन करने की अपील की थी.
हिरासत में लिए जाने के दौरान तेज प्रताप यादव पुलिस की गाड़ी के दरवाज़े से लटकते हुए नज़र आए. उन्होंने कहा, "हम छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिला मिलाकर खड़े हैं. अगर ज़रूरत पड़ी, तो मैं छात्रों के अधिकारों के लिए जान देने को भी तैयार हूँ."
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने मतभेद के बाद अपनी अलग पार्टी बना ली थी.
तेज प्रताप यादव बिहार की नीतीश कुमार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं.
बिहार में प्रदर्शन
शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र की मांग को लेकर चले आंदोलन के दौरान बिहार में भी छात्राओं और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था.
राजधानी पटना से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन कई ज़िलों में पहुँच गया था.
शनिवार 25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया गया था. लेकिन इसी दिन धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया और सरकार से समझौते के बाद सीजेपी ने भी अपना आंदोलन वापस ले लिया था.
लेकिन शनिवार सुबह से ही बिहार के कई ज़िलों में जम कर हिंसा और तोड़-फोड़ भी हुई.
सिवान ज़िले की एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों पर एके-47 से गोलियाँ चला रहा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस घटना में तीन युवक घायल हुए हैं.
बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सिवान की घटना पर चिंता जताई है. उन्होंने एक्स पर अपने पोस्ट में सरकार की आलोचना भी की है और दोषी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है.
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है, "सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर सीधी फायरिंग की. AK-47 से भी फायरिंग की गई. जब 7 हत्याओं का आरोपी अपराधी मुख्यमंत्री बन जाए तब लोकतंत्र में प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर पुलिस ऐसे ही गोलियां चलाती है. दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो."
सिवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने पत्रकारों से बातचीत में इसकी पुष्टि की है कि फ़ायरिंग में कुछ लोग घायल हुए हैं.
उन्होंने कहा, "पुलिस ने आत्मरक्षा में उस समय गोलियाँ चलाईं, जब कुछ असमाजिक तत्व प्रदर्शनकारियों के बीच घुस गए और उन्होंने पुलिस पर फ़ायरिंग की. हमें अभी ये पता करना है कि जो लोग घायल हुए हैं, वे पुलिस की गोलियों से हुए हैं या प्रदर्शनकारियों की गोलियों से. क्योंकि फ़ायरिंग दोनों तरफ़ से हुई है."
सिवान के साथ-साथ छपरा में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगह झड़प हुई. हिंसक प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गाड़ियों में तोड़-फोड़ की गई और पथराव भी हुआ. पुलिस ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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